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बेगूसराय में 15 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, 3.75 लाख के लालच में दिया बैंक खाता

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बेगूसराय साइबर थाना पुलिस ने 15 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। आरोपी ने 3.75 लाख रुपये के लालच में अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को दे दिया था।

बेगूसराय/आलम की खबर: बिहार के बेगूसराय जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इस मामले में गिरफ्तार युवक का बैंक खाता साइबर अपराधियों के लिए “म्यूल अकाउंट” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने महज 3 लाख 75 हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता साइबर गिरोह को सौंप दिया था, जिसके जरिए अलग-अलग राज्यों में करीब 15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की गई।मामला Begusarai जिले के फुलवड़िया थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई पटना से मिली सूचना के आधार पर साइबर थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि फुलवरिया गांव निवासी सुनील कुमार का बैंक खाता संदिग्ध लेनदेन में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब आरोपी के बैंक खाते की जांच की गई तो बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पिछले करीब आठ महीनों में देशभर के विभिन्न राज्यों से इस खाते के खिलाफ 205 शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी एनसीआरपी पर दर्ज पाई गईं। इन शिकायतों में ठगी गई रकम का कुल आंकड़ा करीब 15 करोड़ 25 लाख 35 हजार 307 रुपये तक पहुंच गया।

जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी लोगों को डिजिटल फ्रॉड, फर्जी निवेश योजना, ऑनलाइन लोन, नौकरी और बैंकिंग अपडेट के नाम पर जाल में फंसाते थे। ठगी की रकम सबसे पहले सुनील कुमार के बैंक खाते में जमा कराई जाती थी। इसके बाद रकम को तुरंत अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि असली अपराधियों तक पुलिस की पहुंच मुश्किल हो जाए।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि इस पूरे नेटवर्क में उसके अलावा तीन अन्य लोग भी शामिल हैं। साइबर अपराधियों ने उसे खाते के इस्तेमाल के बदले 3.75 लाख रुपये देने का लालच दिया था। आरोपी ने लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम और अन्य बैंकिंग सुविधाएं गिरोह को सौंप दीं।साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है। अपराधी सीधे अपने खाते का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि दूसरे लोगों के बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करते हैं। इससे जांच एजेंसियों को वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। हाल के वर्षों में देशभर में इस तरह के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर गिरोह अब ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों के लोगों को निशाना बना रहे हैं। बेरोजगारी और पैसों की जरूरत का फायदा उठाकर लोगों को बैंक खाता किराए पर देने या बेचने के लिए तैयार किया जाता है। कई बार लोगों को यह तक नहीं पता होता कि उनके खाते का इस्तेमाल करोड़ों रुपये की अवैध ट्रांजैक्शन में किया जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार साइबर अपराध का नेटवर्क अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। इंटरनेट और डिजिटल बैंकिंग के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण गांवों तक भी साइबर अपराधियों की पहुंच बन चुकी है। अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।

बेगूसराय साइबर थाना की टीम अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल रिकॉर्ड, आईपी एड्रेस और बैंकिंग डाटा की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क का दायरा कई राज्यों तक फैला हो सकता है।पुलिस ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल नंबर या ओटीपी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए नहीं देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो वह अनजाने में बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में बैंकिंग सुरक्षा को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है। कई लोग आसान कमाई के लालच में अपने बैंक खाते दूसरों को दे देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें गंभीर कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के झांसे में न आएं।

इस घटना के बाद इलाके में भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि गांवों तक फैल रहे साइबर अपराध के नेटवर्क को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। वहीं पुलिस का मानना है कि लगातार कार्रवाई और तकनीकी जांच के जरिए ऐसे गिरोहों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर पूरे गिरोह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

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